बड़ी फ़ाइल और वीडियो कैसे भेजें (badi file kaise bheje)
WhatsApp पर भेजी शादी की वीडियो धुंधली पहुँची, या Gmail कह रहा है कि फ़ाइल बहुत बड़ी है? पहले इन दोनों की असली सीमाएँ समझिए, फिर देखिए कि उनसे आगे कौन-सा मुफ़्त रास्ता ठीक है।
ईमेल अटैचमेंट या अपलोड की सीमा में PDF को ले आइए। सुरक्षित रास्ता चुनिए या ज़्यादा असरदार वाला।
कोई अपलोड नहीं
PDF यहाँ छोड़ें
एक फ़ाइल चुनिए, उसके पृष्ठ गिन लिए जाएँगे। फ़ाइल भेजी नहीं जाती।
मौजूदा आकार और पृष्ठ संख्या दिख जाती है।
तयशुदा «सिर्फ़ तस्वीरें छोटी करें» है। रिज़ॉल्यूशन और गुणवत्ता तय करते हैं कि कितना घटाना है। और चाहिए तो «हर पन्ने को तस्वीर बना दें» पर जाइए।
कितना घटा, यह साथ में बताया जाता है। नतीजा मूल से बड़ा निकले तो आपको मूल फ़ाइल ही वापस मिलती है।
PDF का लगभग पूरा आकार उसके अंदर की तस्वीरें होती हैं। अक्षर चाहे जितने हों, कुछ दसियों KB ही लेते हैं। इसलिए सिर्फ़ तस्वीरों को कम रिज़ॉल्यूशन पर दोबारा सहेजने से फ़ाइल बहुत घट जाती है और एक अक्षर भी नहीं छूता।
अक्षर, तालिकाएँ और रेखाएँ वैसी की वैसी रहती हैं, चुनी भी जा सकती हैं, खोजी भी। जिन तस्वीरों का प्रारूप सुरक्षित ढंग से संभाला नहीं जा सकता, उन्हें छुआ नहीं जाता, और परिणाम में लिखा रहता है कि कितनी छोटी हुईं और कितनी जस की तस रहीं।
हर पृष्ठ आपकी तय की गई रिज़ॉल्यूशन पर तस्वीर की तरह दोबारा बनाया जाता है। तस्वीरों या स्कैन से भरे दस्तावेज़ अक्सर आधे से भी कम रह जाते हैं।
क़ीमत यह है कि पाठ तस्वीर का हिस्सा बन जाता है, न चुना जा सकेगा, न खोजा जा सकेगा। जमा करने या संग्रह के दस्तावेज़ों के लिए नहीं; सिर्फ़ देखने भर की सामग्री के लिए ठीक है।
रिज़ॉल्यूशन कम रखने पर बचत ज़्यादा होती है पर पाठ धुंधला पड़ता है। स्क्रीन पर पढ़ने के लिए लगभग 120 DPI आरामदेह जगह है।
अगर अंदर की तस्वीरें पहले से छोटी हैं, या दस्तावेज़ ज़्यादातर अक्षरों का है, तो घटाने को कुछ ख़ास बचता नहीं। पारदर्शी पृष्ठभूमि वाली तस्वीरें और श्वेत-श्याम स्कैन प्रारूप वैसे ही छोड़ दिए जाते हैं, क्योंकि उन्हें दोबारा दबाने से हालत बिगड़ती है। तब «हर पन्ने को तस्वीर बना दें» आज़माइए, या जो पन्ने नहीं चाहिए उन्हें निकाल दीजिए।
ऐसे में आपको मूल फ़ाइल वापस मिलती है और साथ में सूचना भी। संपीड़न के नाम पर हम फ़ाइल बड़ी नहीं करेंगे।
नहीं। पाठ एक बार तस्वीर बन गया तो मूल पाठ चला जाता है। अपनी मूल फ़ाइल सँभालकर रखिए।
तस्वीर वाला तरीक़ा हर पृष्ठ दोबारा बनाता है, इसलिए हाँ। प्रगति गिनती के रूप में दिखती है, और फ़ोन पर मेमोरी कम पड़ने की चेतावनी पहले ही आ जाती है।
WhatsApp पर भेजी शादी की वीडियो धुंधली पहुँची, या Gmail कह रहा है कि फ़ाइल बहुत बड़ी है? पहले इन दोनों की असली सीमाएँ समझिए, फिर देखिए कि उनसे आगे कौन-सा मुफ़्त रास्ता ठीक है।
Gmail कहता है अटैचमेंट बहुत बड़ा है, या पोर्टल 300 kb से छोटी फ़ाइल माँगता है। PDF में जगह असल में कौन घेर रहा है, पहले कौन-सा क़दम लें, और फ़ाइल किसी साइट पर भेजे बिना उसे सही साइज़ में कैसे लाएँ।
फ़ॉर्म भरने की आख़िरी रात, और तीसरी PDF पर "limit reached"। मुफ़्त PDF साइटें कहाँ जाकर रुकती हैं, वे अपनी सीमा के बारे में ख़ुद क्या छापती हैं, और एक शाम में दस फ़ाइलें बिना पैसे कैसे निपटाएँ।